सोमवार, 6 अगस्त 2018

मोदी को गालियां देकर चुनाव जीतना चाहती है कांग्रेस


                      डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया
बेशक कांग्रेस एक पुरानी और बड़ी पार्टी है. 1950 के बाद से उसने देश की जनता पर लगातार राज किया. नेहरू, शास्त्री और इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक और 10 साल यूपीए के शासन में मनमोहन सिंह ने देश के प्रधानमंत्री के पद पर कार्य किया. कोई शिखर पर पहुंच सकता है लेकिन शिखर पर हमेशा बना रहेगा यह मुमकिन नहीं. जनता बदलाव चाहती है और करती है. यही कारण है कि 2004 और 2009 में कांग्रेस का जनाधार घट गया. घटे जनाधार के कारण ही कांग्रेस को सत्ता में बने रहने के लिए यूपीए के दोनों कार्यकालों में क्षेत्रीय दलों से गठबंधन कर सत्ता में बने रहने के लिए बाध्य होना पड़ा. निश्चित ही यह उनके जनाधार के खिसकने की कहानी है. जो पार्टी अपने दम पर कभी स्पष्ट बहुमत के साथ देश की सत्ता पर काबिज रहती रही हो उसे उसकी वर्तमान की  यह गिरावट रास नहीं आ सकती.

मंगलवार, 24 जुलाई 2018

राहुल ने जितने अंक अर्जित किए उससे कई गुना खो दिए

                 डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया
कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि समूचा विपक्ष राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को स्वीकार कर ले वह इसलिए कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी है, इसलिए कि कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता भी यही चाहते हैं. लेकिन विपक्षी दलों में ना कोई हड़बड़ाहट है और ना नेतृत्व के लिए राहुल को स्वीकार करने की मजबूरी. जिस कांग्रेस के पास पूरे देश में आज मात्र मिजोरम, पंजाब, कर्नाटक तथा मेघालय राज्य ही बचे हैं और जिस का जनाधार सिकुड़कर पतले से भी पतला हो गया है, और जब कि क्षेत्रीय दलों को 2019  में अपनी संभावनाएं ज्यादा नजर आ रही हों तब समूचा विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने में क्यों रुचि दिखाएगा ?

सोमवार, 9 जुलाई 2018

विपक्ष झूठ को सौ बार बोल कर सच बनाना चाहता है.

                  डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया
2019 के चुनावों को अब लगभग 10 महीने शेष हैं. मोदी विरोधियों में सत्ता पाने की इतनी बेसब्री है जो आज से पहले कभी नहीं देखी गई होगी. देशभर में कांग्रेस समेत सारे विपक्षी दल एनकेन प्रकारेण लगातार मोदी विरोध में नए-नए शगूफे छोड़ रहे हैं. 4 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद इन्हें लगने लगा है कि मोदी का मुकाबला करने के लिए जनता को भ्रमित किया जाना आवश्यक है. यही कारण है कि ये लगातार दलितों पर अत्याचार, सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार, अल्पसंख्यकों में भय, अघोषित आपातकाल, कालाधन, देशभर में किसानों के साथ नाइंसाफी जैसे भ्रमित करने वाले मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं. यही नहीं कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों का हर नेता चीख चीख कर अपने विरोधी एजेंडे को प्रस्तुत कर रहा है. सूत्र एक ही है आक्रामक होकर झूठ बोलो जिससे जनता में यह संदेश जाए कि मोदी ने अपने 4 साल के शासन काल में देश को बर्बाद कर दिया.

बुधवार, 2 मई 2018

पीढ़ियों को संरक्षित धन सौंपना उन्हें पंगु बनाना है..........


डॉ. हरिकृष्ण बड़ोदिया

धर्म आधारित दर्शन मानवमात्र के लिए मार्गदर्शी होने के  साथ वर्तमान समस्याओं के निराकरण में न केवल उपयोगी है बल्कि जीवन को ऐसी नई दिशा की ओर ले जा सकता है जहां व्यक्ति शोक, चिंता, क्लेश, राग और द्वेष आदि से मुक्त हो सकता है. किन्तु वर्तमान जीवन शैली में धर्म के मर्म का कोई स्थान नहीं है ऐसा प्रतीत होता है. यूँ बाह्य रूप से ये दिखाई दे रहा है कि सभी धर्मों के अनुयायी अपने अपने धर्म के प्रति आज ज्यादा संवेदनशील हैं किन्तु यह संवेदनशीलता बहुत हद तक दूसरे के धर्म से अपने धर्म को श्रेष्ठ साबित करने भर तक की है. इसका एक कारण जो प्रतीत होता है वह राजनैतिक लाभ के लिए राजनीतिक दलों की खेमेबाजी भी है तो दूसरा कारण देश की धर्म निरपेक्षता की अवधारणा है जिसने पूरे देश को धर्म के आधार पर बाँटने का काम किया है (क्या ही अच्छा होता कि धर्मनिरपेक्षता के स्थान पर ‘सर्व धर्म समभाव’ का उपयोग किया जाता). कुछ राजनीतिक दल धर्मनिरपेक्षता के आधार पर किसी धर्म विशेष को अपने